जोशीमठ भू-धंसाव को लेकर अब तक जितनी भी अध्ययन रिपोर्ट सामने आईं हैं, उनमें अलकनंदा नदी की ओर से जोशीमठ की जड़ पर किए जा रहे भू-कटाव को भी एक प्रमुख वजह माना गया है। यहां अलकनंदा सदियों से टो-एरोजन कर रही है। शासन ने अब इसके ट्रीटमेंट का प्लान तैयार कर लिया है।
अलकनंदा नदी के किनारे जो टो इरोजन हो रहा है, उसके लिए वेबकॉस को कार्यदायी संस्था बनाते हुए ट्रीटमेंट का काम दिया जाएगा। जोशीमठ शहर को लेकर अब तक चार प्रमुख शोध हुए हैं। इनमें भू-धंसाव को लेकर जो पांच प्रमुख कारण सामने आए हैं, उनमें से एक अलकनंदा नदी की ओर से किया जा रहा भू-कटाव भी है।
शासन की ओर से गठित समिति की जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें भी इस तथ्य को प्रमुखता से उजागर किया गया है। रिपोर्ट में भविष्य में भी अलकनंदा की ओर से होने वाले कटाव को खतरनाक बताया गया है। इससे नए लैंडस्लाड जोन के विकसित होने की आशंका जताई गई है।
कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर जय देवभूमि फाउंडेशन द्वारा कण्वनगरी कोटद्वार…
हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पर पहुंचीं 99 साल की हरवंत कौर ने अपनी आस्था का…
एक समय था जब भारत की बिजली जरूरतें मुख्य रूप से कोयला और पारंपरिक ऊर्जा…
आमिर खान ने 61 वर्ष की उम्र में गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी की है,…
Kanpur NEET Scorecard Chaos: पनकी की नीट छात्रा आर्या सिंह के परिणाम में एनटीए (NTA) की…
कोटद्वार : स्टेडियम में फुटबॉल का जुनून: भारी भीड़ के बीच सेमीफाइनल की दो टीमें…